17 अति पिछड़ी जातियों को एससी कोटे में लाने के लिए प्रस्ताव भेजेगी यूपी सरकार

18
योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

लखनऊ। यूपी में बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार अनुसूचित जातियों की श्रेणी में 17 अति पिछड़ी जातियों को शामिल करने वाला प्रस्ताव भेजने को तैयार है। इसे यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के 2019 के लिए बने संभावित गठबंधन के तोड़ के रूप में भी देखा जा रहा है।
गोरखपुर और फूलपुर सीट पर समाजवादी पार्टी- बीएसपी के गठबंधन के प्रभाव को देखते हुए बीजेपी अब अति दलित और अति पिछड़े वर्ग को साधने की कोशिशों में जुटी है। बीजेपी ने अनुसूचित जातियों को पदोन्नति में भी आरक्षण देने का वादा किया है। माना जा रहा है कि जातीय गोलबंदी की वजह से एसपी प्रत्याशी ने इन दोनों हाई प्रोफाइल सीटों पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी की नजर अब सोशल इंजिनियरिंग के जरिए दोनों पार्टियों के वोट बैंक में सेंध लगाने पर है।
बता दें कि इससे पहले आरक्षण को लेकर दोनों क्षेत्रीय पार्टियां बीजेपी को घेरती आई हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी अब अगले चुनाव के लिए जातीय अंकगणित को नए सिरे से पेश करने में जुटी है। सीएम योगी आदित्यनाथ पहले ही अति पिछड़ी और अति दलित जातियों को आरक्षण दायरे में लाने के लिए विधानसभा में ऐलान कर चुके हैं लेकिन यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जा रहा हो।
पिछले 18 वर्षों में इस तरह के तीन प्रयास हो चुके हैं लेकिन सभी विफल रहे। इससे पहले मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार और 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती भी इसी तरह का प्रस्ताव भेज चुकी हैं। यही नहीं 2001 में तत्कालीन सीएम राजनाथ सिंह के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने भी कुछ इसी तरह का कदम उठाया था और हुकुम सिंह कमिटी भी गठित की थी जिसके तहत अति दलित और अति पिछड़ों के लिए अलग आरक्षण की मांग की गई थी। इस कदम को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी लेकिन एसपी-बीएसपी के विरोध के कारण रिपोर्ट लागू नहीं हो सकी थी।

http://www.alconi.ro/?best-essay-writer-service

go source एसपी-बीएसपी के विरोधाभास को सामने लाने में जुटी बीजेपी
अब योगी आदित्यनाथ ने भी उसी उद्देश्य के तहत आरक्षण की मंशा जाहिर की है लेकिन एससी कैटिगरी के तहत 17 अति पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण घोषित होने में फिलहाल समय लग सकता है। ये 17 अति पिछड़ी जातियां इस प्रकार हैं- राजभर, निषाद, प्रजापति, मल्लाह, कहर, कश्यप, कुम्हार, धीमर, बिंड, भर, केवट, धीवर, बाथम, मछुआ, मांझी, तुरहा और गौर।
इसी तरह की एक लिस्ट की सिफारिश 2004 में मुलायम सरकार और 2016 में अखिलेश सरकार के द्वारा की गई थी। हालांकि तब मायावती ने इसका खुले तौर पर विरोध किया था क्योंकि इससे एसटी कोटे में उनके पारंपरिक दलित मतदाताओं का हिस्सा कम हो सकता है जिनके लिए 22.5 फीसदी आरक्षण निर्धारित है। यानी इस कदम के जरिए, बीजेपी न सिर्फ अति पिछड़े दलित वर्ग पर अपना प्रभाव बनाने का प्रयास करेगी बल्कि इस मुद्दे पर एसपी और बीएसपी के रुख के विरोधाभास का पर्दाफाश करने की कोशिश भी करेगी।

Breaking News
दुनिया का चक्कर लगाने वालीं INSV तारिणी की 6 महिला कमांडरों से मिले पीएम मोदीतीन साल तक पेट्रोल-डीजल पर लकी थे मोदी, एक साल से किस्मत खराबग्वालियर: आंध्र प्रदेश एसी एक्सप्रेस ट्रेन के 4 कोच में लगी आग, यात्री सुरक्षितकर्नाटक का असर: क्या बीजेपी के मिशन 400 के लिए चुनौती होगा साउथ?कर्नाटक: कांग्रेस-जेडीएस की जीत में ये बने ‘गेमचेंजर’हम सबको मिलकर बनाना होगा गंदगी मुक्त भारत- योगेन्द्र कुमार साहूहल्द्वानीः राजपुरा क्षेत्र में गहराता जा रहा है पेयजल संकट- हेमंत साहूजानें वट सावित्री व्रत में वट वृक्ष का क्‍या है महत्‍वयूपीः सीतापुर में आदमखोर कुत्तों का आतंक, प्रशासन ने बच्चों का सड़क पर निकलना किया बैनचुनाव प्रचार के आखिरी दिन राहुल गांधी का बीजेपी-मोदी पर हल्ला बोल